-->
Showing posts with label रचना एवं कविताएँ. Show all posts
Showing posts with label रचना एवं कविताएँ. Show all posts

जिंदगी की उड़ान!

 जिंदगी की उड़ान अब थक गई हूँ चलते-चलते,  अब थोड़ा आराम चाहती हूँ। ऐ जिंदगी अब थोड़ी ठहर जा,  मैं खुद को जानना चाहती हूँ।  और से तो सुन लिया ह...

मै शब्द हूं! I am word

 शीर्षक- मै शब्द हूं! मैं शब्द हूं! मै कहीं मौन तो कहीं व्यक्त हूं  मै कड़वा भी हूं और मीठा भी  मै सम्मान भी पाता हूं  और अपमानित भी होता हू...

मेरा देश-मेरा वतन, Mera desh- Mera vatan

देश मेरा धर्म है, देश ही मेरी जान देश से ही मैं हूँ, इससे ही मेरी शान मेरे देश की माटी, अमृत समान है इस देश के खातिर, ये तन कुर्वान है। तिरं...

कविता - "माँ"

माँ की दुआओं ने,  आज ऐसा काम किया नालायक था जीवन मे,  समाज मे ऊँचा नाम दिया। माँ! कोख में रखकर तुमने,  न जाने कितने कष्ट सहे मेरे आने की खुश...

रिश्तों की डोर नही कमजोर

                                                                 लेखक- //श्याम कुमार कोलारे// आज कल उखड़े-उखड़े से, मिजाज लगते है पता नही बेबज...

//अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस विशेष// कविता- मजदूर

 //अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस विशेष// कविता- मजदूर साधारण सी सख्सियत,शक्ति से भरपूर हूँ       नया निर्माण है जीवन मेरा,मैं धरा का सूर हूँ   ...

//अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस विशेष// कविता- मजदूर

 //अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस विशेष// कविता- मजदूर साधारण सी सख्सियत,शक्ति से भरपूर हूँ       नया निर्माण है जीवन मेरा,मैं धरा का सूर हूँ   ...

कविता- सफलता की आगाज (start of success)

  कविता- सफलता की आगाज घुंगरू की तरह खनकना है तो तुम्हे पाँजे बनना होगा थिरकन हो ऐसी पावों की जान पूरी लगाना होगा। आगाज हो ऐसी ध्वनि में सिं...

कविता- सफलता की आगाज (start of success)

  कविता- सफलता की आगाज घुंगरू की तरह खनकना है तो तुम्हे पाँजे बनना होगा थिरकन हो ऐसी पावों की जान पूरी लगाना होगा। आगाज हो ऐसी ध्वनि में सिं...

कविता- नारी सब पर भारी

नारी को अबला न समझो नारी नर की खान रे जिस घर पूजी जाती नारी वह घर स्वर्ग समान रे। भारत की नारी है सबला पड़ती सब पर भारी रे जो समझे असहाय उसक...

कविता- नारी सब पर भारी

नारी को अबला न समझो नारी नर की खान रे जिस घर पूजी जाती नारी वह घर स्वर्ग समान रे। भारत की नारी है सबला पड़ती सब पर भारी रे जो समझे असहाय उसक...

कविता - नवरात्री के नौ दिन

आया नवरात्रि का पर्व, घर मे है खुशियाँ आपार माता का जगराता चलता, भक्तिमय हुआ संसार जगमग जगमग जोत जलें, भक्ति में है लोग लगे माता की सेवा में...

कविता - नवरात्री के नौ दिन

आया नवरात्रि का पर्व, घर मे है खुशियाँ आपार माता का जगराता चलता, भक्तिमय हुआ संसार जगमग जगमग जोत जलें, भक्ति में है लोग लगे माता की सेवा में...

कविता-सफलता की सीढ़ी The step of success

  कविता-सफलता की सीढ़ी सफलता की सीढ़ी पर गर चढ़ना हो तो आराम नही सिर्फ चलते रहना है सतत सौहरत की मंजिल आसान नही यहाँ असफलताओ का दिल से करो मनन।...